बुधवार 20 मई 2026 - 22:12
सुप्रीम लीडर याद में लखनऊ में भव्य इंटरफेथ सेमिनार, अमेरिका और इसराइल की नीतियों पर कड़ी आलोचना

लखनऊ के प्रसिद्ध धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थान "तंज़ीमुल मकातिब" में "शहीद रहबर, विश्व-मानवता के पथप्रदर्शक" विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरधार्मिक सेमिनार और मजलिस-ए-अज़ा में विभिन्न धर्मों के विद्वानों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और सामाजिक हस्तियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने ईरान की प्रतिरोधात्मक नीति, वैश्विक अत्याचार के खिलाफ संघर्ष और शहीद रहबर की कुर्बानियों को श्रद्धांजलि देते हुए अमेरिका की वैश्विक वर्चस्व की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में 16 और 17 मई को तंज़ीमुल मकातिब के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरधार्मिक सेमिनार और मजलिस-ए-अज़ा में देश भर से आए विद्वानों, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों, पत्रकारों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। "शहीद रहबर, विश्व-मानवता के पथप्रदर्शक" विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने शहीद रहबर सैयद अली खामनेई (र) की सेवाओं, सब्र और इस्तिक़ामत तथा दुनिया के मज़लूमों के समर्थन को भरपूर श्रद्धांजलि दी।

सेमिनार को संबोधित करते हुए भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि आज ईरान दुनिया का एकमात्र देश है जो अत्याचार और इस्तिकबार के खिलाफ दृढ़ता के साथ खड़ा है और हर मज़लूम का समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रतिरोधात्मक रुख के कारण ईरान को लगातार कुर्बानियाँ देनी पड़ रही हैं, लेकिन ईरान की जनता अत्याचारी ताकतों के सामने कभी सिर नहीं झुकाएगी। उन्होंने कहा कि "हम इससे भी बड़ी कुर्बानियों के लिए तैयार हैं, लेकिन ज़ालिमों के सामने घुटने नहीं टेकेंगे।" भाषण के अंत में उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन (अ) के मसाइब का भी वर्णन किया।

कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडे ने अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ट्रंप लोकतंत्र के नाम पर दुनिया में भय, अव्यवस्था और लूट-खसोट को बढ़ावा देना चाहते हैं ताकि वैश्विक शक्ति बने रहें। उन्होंने कहा कि अमेरिका का इतिहास अत्याचार, रक्तपात और शोषणकारी राजनीति से भरा है। अशोक पांडे ने कहा कि यदि ट्रंप फिरदौसी की विश्व प्रसिद्ध रचना "शाहनामा" का अध्ययन करते, तो ईरान के खिलाफ आक्रामकता की कल्पना भी नहीं करते।

उन्होंने आगे कहा कि यह केवल किसी एक संप्रदाय या देश की लड़ाई नहीं है, बल्कि दुनिया की स्वतंत्रता, संप्रभुता और साम्राज्यवादी ताकतों के प्रभुत्व के खिलाफ एक निर्णायक संग्राम है।

सेमिनार को संबोधित करते हुए पंडित विजय शर्मा ने शहीद सुप्रीम लीडर की दृढ़ता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका के सामने झुकने के बजाय प्रतिरोध का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया में अशांति पैदा करके अपने हितों को प्राप्त करना चाहता है।

मध्य प्रदेश से आए समाजवादी नेता और पूर्व विधायक डॉ. सनीलम सिंह ने भी अमेरिका की नीतियों पर आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन हर देश को अपनी गुलामी में रखना चाहता है, लेकिन ईरान ने इस बदमाशी का करारा जवाब दिया है।

सेमिनार के विभिन्न सत्रों में देश के कई विद्वानों, बुद्धिजीवियों और विचारकों ने भी भाषण दिए। कार्यक्रम का संचालन अनिस जायसी ने किया, जबकि अध्यक्षता तंज़ीमुल मकातिब के अध्यक्ष आक़ाए शमीमुल मिल्लत सय्यद शमीमुल हसन ने की। संस्थान के सचिव सैयद सफ़ी हैदर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मौलाना सैयद सबीहुल हुसैन, मौलाना सय्यद रज़ा हुसैन, मौलाना सफ़दर जौनपुरी, मौलाना उरूज, मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना कल्ब रशीद और मौलाना वसी हसन खान सहित कई प्रमुख विद्वान शामिल हुए।

मेहमानों का स्वागत मौलाना मुमताज़ जाफ़री, मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन और उनकी टीम ने किया।

सेमिनार के अंतिम सत्र में तंज़ीमुल मकातिब द्वारा तैयार की गई शहीद रहबर की जीवनी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रस्तुत की गई, जबकि मजमा-ए-जहानी-ए-अहले-बैत (अलैहिमुस्सलाम) के सचिव हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन रमज़ानी के विशेष संदेश का उर्दू अनुवाद भी उपस्थित लोगों को सुनाया गया।

उल्लेखनीय है कि यह दो दिवसीय सेमिनार चार विभिन्न सत्रों पर आधारित था, जिसके समापन पर हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन सय्यद सफ़ी हैदर ने सभी प्रतिभागियों, मेहमानों और महिलाओं एवं पुरुषों का आभार व्यक्त किया।

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